ए चाँद, मत निकलना तू, हमे तेरी आदत नहीं |

जिसे याद करते थे तुझे देख कर, अब वो दिलरुबा नहीं |

चाँद संभाल तेरी चांदिनी को, बिखर ना जाये,
मत कर इतनी रोशिनी कहीं रात निकल ना जाए |

ए चाँद, तुझपर भी दाग है, तुझसे हसीन मेरा यार,
दो आँखों का नूर है वो, दो आँखों का इंतज़ार |

ए चाँद, नहाता है तू अपनी चांदिनी में पर दाग धो ना सका,
जिससे हमने दिल लगाया वो दिल हमारा हो ना सका |

ए चाँद, मत निखर इतना की हम वो पतंगा नहीं,
छूना चाहते है तुझे पर हमारे पंख नहीं |
जिसे याद करते थे तुझे देख कर, अब वो दिलरुबा नहीं |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *