ईमान से

दुश्मनी दिल की पुरानी चल रही है जान से, ईमान से

लड़ते लड़ते ज़िन्दगी गुज़री है बेईमान से, ईमान से

रातके पिछले पहेर बन बनके आया एक सवाल, उसका खयाल

और फिर जैसे धुआँ उठने लगा लबों से, ईमान से

ए वतन! इक रोज़ तेरी ख़ाक में खो जाएंगे, सो जाएंगे

मरके भी रिश्ता नही टूटेगा हिन्दुस्तान से, ईमान से….