Sabki pagadi ko hawaaon mein uchhala jaye

सबकी पगड़ी को हवाओ में उछाला जाए

सोचता हूँ कोई अखबार निकाला जाए,

पीके जो मस्त हैं उनसे कोई खौफ़ नहीं

पीके जो होश में हैं उनको संभाला जाए

आसमान ही नहीं एक चाँद भी रहता हैं यहाँ

भुल कर भी कभी पत्थर ना उछाला जाए

नये ऐवान की तामीर ज़रूरी हैं

मगर पहले हम लोगो को मलबे से निकाला जाए

Hum khush dikhai dete hain

Ye jo hum khush dikhai dete hain,,

Hunar hain humara, haqiqat nahin!!

ये जो हम खुश दिखाई देते हैं,,

हुनर हैं हमारा, हक़ीक़त नहीं!!