Do Kadam Aur Sahi

Diye bujhe hain magar door tak ujala hain

Ye aap aye hain ya din nikalne wala hain

Nayi sahar hain naya gum naya ujala hain

Razai chod do ab din nikalne wala hain

Khayal me bhi tera aqs dekhne ke bad

Jo shaks hosh gawa de wo hosh wala hain

Jawab dene k andaz bhi nirale hain

Salam karne ka andaz bhi nirala hain

Sunahri dhoop hai sadqa tere tabassum ka

Ye chandani teri parchhai ka ujala hain

Hai tere pairo ki ahat zamin ki Gardhish

Ye asman teri angdai ka hawala hain

-Do kadam aur sahi, Page 25

-Rahat Indori

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दिए बुझे हैं मगर दूर तक उजाला है

ये आप आए हैं या दिन निकलने वाला है

नई सहर है नया गम नया उजाला है

रज़ाई छोड़ दो अब दिन निकलने वाला है

ख्याल में भी तेरा अक़्स देखने के बाद

जो शख्स होश गवाँ दे वो होश वाला है

जवाब देने के अंदाज़ भी निराले हैं

सलाम करने का अंदाज़ भी निराला है

सुनहरी धूप है सदक़ा तेरे तबस्सुम का

ये चाँदनी तेरी परछाई का उजाला है

है तेरे पैरो की आहट ज़मीन की गर्दिश

ये आसमान तेरी अंगड़ाई का हवाला है

दो कदम और सही, Page 25

-राहत इंदौरी

Sabki pagadi ko hawaaon mein uchhala jaye

सबकी पगड़ी को हवाओ में उछाला जाए

सोचता हूँ कोई अखबार निकाला जाए,

पीके जो मस्त हैं उनसे कोई खौफ़ नहीं

पीके जो होश में हैं उनको संभाला जाए

आसमान ही नहीं एक चाँद भी रहता हैं यहाँ

भुल कर भी कभी पत्थर ना उछाला जाए

नये ऐवान की तामीर ज़रूरी हैं

मगर पहले हम लोगो को मलबे से निकाला जाए

ईमान से

दुश्मनी दिल की पुरानी चल रही है जान से, ईमान से

लड़ते लड़ते ज़िन्दगी गुज़री है बेईमान से, ईमान से

रातके पिछले पहेर बन बनके आया एक सवाल, उसका खयाल

और फिर जैसे धुआँ उठने लगा लबों से, ईमान से

ए वतन! इक रोज़ तेरी ख़ाक में खो जाएंगे, सो जाएंगे

मरके भी रिश्ता नही टूटेगा हिन्दुस्तान से, ईमान से….